रायपुर: जशपुर जिले में शिक्षा सत्र 2026-27 के शुभारंभ के अवसर पर जिला स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन उत्साह और गरिमापूर्ण वातावरण में किया गया। कार्यक्रम में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का पारंपरिक स्वागत कर उन्हें नई पुस्तकों, स्कूल यूनिफॉर्म तथा शुभकामनाओं के साथ शिक्षा के नए सफर की शुरुआत कराई गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत जशपुर के अध्यक्ष श्री सालिक साय थे। विशिष्ट अतिथियों में छत्तीसगढ़ माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष श्री शंभूनाथ चक्रवर्ती, नगर पालिका परिषद जशपुर के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार भगत, जनपद पंचायत जशपुर के अध्यक्ष श्री गंगाराम भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। सरस्वती शिशु मंदिर की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर कक्षा पहली, छठवीं एवं नवमी के नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं का तिलक लगाकर, पुष्पमाला पहनाकर और मिठाई खिलाकर स्वागत किया गया तथा उन्हें नई पुस्तकें एवं स्कूल यूनिफॉर्म वितरित की गई।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के अंतर्गत सेजस हिंदी माध्यम स्कूल तथा महारानी लक्ष्मीबाई कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जशपुर की छात्राओं ने शिक्षा आधारित आकर्षक गीत एवं नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

मुख्य अतिथि श्री सालिक साय ने विद्यार्थियों को मन लगाकर पढ़ाई करने और जीवन में शिक्षा को सफलता का आधार बनाने के लिए प्रेरित किया। श्री शंभूनाथ चक्रवर्ती ने भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए गुरु द्रोणाचार्य और एकलव्य का उदाहरण प्रस्तुत किया। श्री अरविंद कुमार भगत ने शिक्षा के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला, जबकि श्री गंगाराम भगत ने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ-साथ माता-पिता एवं गुरुओं का सम्मान करने का आह्वान किया।
जिला शिक्षा अधिकारी श्री नरेंद्र कुमार सिन्हा ने विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए प्रवेश उत्सव का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत कक्षा नवमी की छात्राओं को निःशुल्क साइकिलों का वितरण भी किया गया।
कार्यक्रम का समापन आभार प्रदर्शन के साथ हुआ। आयोजन को सफल बनाने में शिक्षा विभाग के अधिकारियों, शिक्षकों एवं विद्यालय परिवार का उल्लेखनीय योगदान रहा।



