पुलिस ने तेज की कार्रवाई की तैयारी
रायपुर। साइबर अपराध के तौर-तरीके तेजी से बदल रहे हैं। ठगी की रकम कुछ ही मिनटों में कई बैंक खातों में पहुंचाई जा रही है। ऐसे मामलों में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया और तकनीक आधारित जांच को मजबूत करने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस राज्य पुलिस अकादमी, चंद्रखुरी में कार्यशाला आयोजित की गई।
वित्तीय अपराध एवं त्वरित प्रतिक्रिया की तैयारी विषय पर आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह ने किया। कार्यशाला में साइबर अपराध विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन ने निवेश और ट्रेडिंग घोटाले, डिजिटल लेंडिंग फ्रॉड (ऑनलाइन ऋण धोखाधड़ी), फर्जी केवाईसी, यूपीआई-क्यूआर कोड धोखाधड़ी, दुर्भावनापूर्ण एपीके, क्रिप्टोकरेंसी और म्यूल अकाउंट नेटवर्क से जुड़े अपराधों की जांच के संबंध में जानकारी दी।
कार्यशाला में बैंकों, भुगतान नेटवर्क, फिनटेक कंपनियों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और अन्य एजेंसियों के साथ त्वरित समन्वय को भी जरूरी बताया गया। कार्यशाला में पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक दीपांशु काबरा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डॉ. आनंद छाबड़ा, पुलिस महानिरीक्षक प्रशांत अग्रवाल समेत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से करीब 300 अधिकारी मौजूद थे।

‘गोल्डन आवर’ में कार्रवाई जरूरी
महानिदेशक (प्रशिक्षण) जीपी सिंह ने कहा कि साइबर-वित्तीय अपराध में शुरुआती घंटे कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण होते हैं। धनराशि कुछ ही समय में कई खातों और अलग-अलग न्यायक्षेत्रों में पहुंच सकती है। ऐसे में पुलिस की प्रतिक्रिया तत्काल और समन्वित होनी चाहिए। उन्होंने रिपोर्ट दर्ज करने, धनराशि ट्रेस करने, खाते फ्रीज कराने, डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने और जांच की प्रक्रिया पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि जांच का लक्ष्य केवल यह पता लगाना नहीं होना चाहिए कि पैसा कहां गया, बल्कि उसके पीछे मौजूद नेटवर्क तक पहुंचना भी होना चाहिए। इसके लिए पीड़ित, डिवाइस (इलेक्ट्रॉनिक उपकरण), डिजिटल फुटप्रिंट (डिजिटल गतिविधियों के निशान), लेन-देन और म्यूल अकाउंट के बीच कड़ियां जोड़ना जरूरी है।
विशेषज्ञों ने साइबर ठगी के मामलों में तत्काल शिकायत दर्ज कराने और संदिग्ध लेन-देन की जानकारी तुरंत संबंधित एजेंसियों को देने की जरूरत बताई।
मुख्य बिंदु
राज्य पुलिस अकादमी में कार्यशाला, 300 अधिकारी हुए शामिल।
डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखना जांच की अहम कड़ी, म्यूल अकाउंट से जुड़े नेटवर्क पर फोकस।
साइबर अपराध में शुरुआती समय में कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण।
ठगी की रकम को तत्काल ट्रेस कर खातों को फ्रीज कराने पर जोर।
पीड़ित, डिवाइस, डिजिटल फुटप्रिंट और लेन-देन के बीच कड़ियां जोड़कर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की जरूरत।



